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अराजकता का उत्तरदायी कौन ?

सांप्रतिक भारत की विभीषिका का मूल अन्वेषण करता यह आलेख ‘अराजकता’ के उत्तरदायी कारकों की शास्त्रीय मीमांसा प्रस्तुत करता है। लेख में स्पष्ट किया गया है कि कैसे ‘अवर्ण-दस्यु’ प्रवृत्ति के लोग, जिन्हें शास्त्रों ने मर्यादाहीनता के कारण बहिष्कृत किया था, आज ‘मनगढ़ंत समानता’ के रथ पर सवार होकर सनातनी मूल्यों का मर्दन कर रहे हैं। ब्राह्मण की सर्वोच्चता से लेकर शूद्र की सवर्ण गरिमा तक, और शासक की दंड-नीति से लेकर वोट बैंक की विवशता तक—यह आलेख हर उस पहलू पर प्रहार करता है जहाँ धर्म की ग्लानी हो रही है। यदि आप वर्तमान अराजकता के वास्तविक मूल और उसके शास्त्रीय समाधान को समझना चाहते हैं, तो यह शोधपरक आलेख आपके लिए अनिवार्य पठनीय है।

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