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हम संविधान के लिये नहीं बने हैं, संविधान हमारे लिये है – संविधान हमारा निर्माता नहीं, निर्मित संविदा है

धर्म बड़ा या संविधान? इस लेख में जानिए क्यों संविधान केवल राजधर्म का एक अंश है और कैसे हमारे मौलिक अधिकार नैसर्गिक हैं, संवैधानिक खैरात नहीं।

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आत्मकल्याण : जन्मसिद्ध अधिकार और व्यवस्थागत हनन

आत्मकल्याण : जन्मसिद्ध अधिकार और व्यवस्थागत हनन : यह आलेख पौराणिक आख्यानों और श्लोकों के माध्यम से यह सिद्ध करता है कि आत्मकल्याण का अधिकार भौतिक जीवन के अधिकार से श्रेष्ठ है और इसे भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में स्थान मिलना चाहिए।

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