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भगवा का नीलान्तरण हो गया और पता ही नहीं चला

क्या संघ शास्त्रों को बदलकर नया हिंदू धर्म गढ़ना चाहता है? ‘नीलान्तरण’ और ‘प्रक्षिप्त शास्त्र’ विवाद पर एक तीखा प्रहार। यह आलेख एक शास्त्रीय वज्रपात है उन छद्म शक्तियों पर जो सनातन के प्रतीकों का हरण कर उसे भीतर से खोखला कर रही हैं।

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शंकराचार्य पर टिप्पणी करने से पूर्व चुल्लू भर पानी तो ढूंढ लो ‘राष्ट्रवादियों’

वर्तमान काल में राजनीति और धर्म के घालमेल ने समाज में एक गहरा सांस्कृतिक संकट उत्पन्न कर दिया है। यह आलेख प्रयागराज माघ मेले के संदर्भ में ‘सत्ता’ और ‘शास्त्र’ के बीच छिड़े संघर्ष का गहन विश्लेषण करता है। वायु पुराण और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों के प्रमाणों के साथ, यहाँ ‘संत’ और ‘आचार्य’ के मध्य उस मौलिक अंतर को स्पष्ट किया गया है जिसे आधुनिक ‘राष्ट्रवादी’ वर्ग विस्मृत कर चुका है। यह आलेख उन लोगों के लिए एक आईना है जो अंधभक्ति के वशीभूत होकर शंकराचार्य जैसे शीर्षस्थ पदों की अवमानना कर रहे हैं।

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