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कर्मकांड विधि

अराजकता का उत्तरदायी कौन ?

अराजकता का उत्तरदायी कौन ?

सांप्रतिक भारत की विभीषिका का मूल अन्वेषण करता यह आलेख ‘अराजकता’ के उत्तरदायी कारकों की शास्त्रीय मीमांसा प्रस्तुत करता है। लेख में स्पष्ट किया गया है कि कैसे ‘अवर्ण-दस्यु’ प्रवृत्ति के लोग, जिन्हें शास्त्रों ने मर्यादाहीनता के कारण बहिष्कृत किया था, आज ‘मनगढ़ंत समानता’ के रथ पर सवार होकर सनातनी मूल्यों का मर्दन कर रहे हैं। ब्राह्मण की सर्वोच्चता से लेकर शूद्र की सवर्ण गरिमा तक, और शासक की दंड-नीति से लेकर वोट बैंक की विवशता तक—यह आलेख हर उस पहलू पर प्रहार करता है जहाँ धर्म की ग्लानी हो रही है। यदि आप वर्तमान अराजकता के वास्तविक मूल और उसके शास्त्रीय समाधान को समझना चाहते हैं, तो यह शोधपरक आलेख आपके लिए अनिवार्य पठनीय है।

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हिसाब तो चुकता करेगा; फिर आगे क्या ?

हिसाब तो चुकता करेगा; फिर आगे क्या ?

हिसाब तो चुकता करेगा: मोदी सरकार का सवर्ण और शास्त्र द्रोह – मोदी के “हिसाब चुकता करेगा” वक्तव्य से लेकर अनिल मिश्रा प्रकरण, UGC 2026 और शंकराचार्य अपमान तक—एक विस्तृत और साक्ष्य-आधारित विश्लेषण।

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भगवा का नीलान्तरण हो गया और पता ही नहीं चला

भगवा का नीलान्तरण हो गया और पता ही नहीं चला

क्या संघ शास्त्रों को बदलकर नया हिंदू धर्म गढ़ना चाहता है? ‘नीलान्तरण’ और ‘प्रक्षिप्त शास्त्र’ विवाद पर एक तीखा प्रहार। यह आलेख एक शास्त्रीय वज्रपात है उन छद्म शक्तियों पर जो सनातन के प्रतीकों का हरण कर उसे भीतर से खोखला कर रही हैं।

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शंकराचार्य पर टिप्पणी करने से पूर्व चुल्लू भर पानी तो ढूंढ लो 'राष्ट्रवादियों'

शंकराचार्य पर टिप्पणी करने से पूर्व चुल्लू भर पानी तो ढूंढ लो ‘राष्ट्रवादियों’

वर्तमान काल में राजनीति और धर्म के घालमेल ने समाज में एक गहरा सांस्कृतिक संकट उत्पन्न कर दिया है। यह आलेख प्रयागराज माघ मेले के संदर्भ में ‘सत्ता’ और ‘शास्त्र’ के बीच छिड़े संघर्ष का गहन विश्लेषण करता है। वायु पुराण और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों के प्रमाणों के साथ, यहाँ ‘संत’ और ‘आचार्य’ के मध्य उस मौलिक अंतर को स्पष्ट किया गया है जिसे आधुनिक ‘राष्ट्रवादी’ वर्ग विस्मृत कर चुका है। यह आलेख उन लोगों के लिए एक आईना है जो अंधभक्ति के वशीभूत होकर शंकराचार्य जैसे शीर्षस्थ पदों की अवमानना कर रहे हैं।

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विकास की वेदी पर अस्तित्व की आहुति: क्या २०४७ का भारत केवल एक जलता हुआ खंडहर होगा?

विकास की वेदी पर अस्तित्व की आहुति: क्या २०४७ का भारत केवल एक जलता हुआ खंडहर होगा?

विकास के नाम पर सवर्णों के अस्तित्व के संहार की सूक्ष्म पड़ताल। क्या २०४७ का भारत विकसित होगा या गृहयुद्ध की ज्वाला में जल रहा होगा? ‘दो टूक’ अन्वेषण।

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मेधा-प्रतिभा ईश्वरीय वरदान है या अभिशाप ?

मेधा-प्रतिभा ईश्वरीय वरदान है या अभिशाप ?

“UGC के नए ‘हायर एजुकेशन रेगुलेशन 2026’ का विस्फोटक विश्लेषण। सवर्ण सांसदों को खुली चेतावनी: या तो सवर्णों की मेधा और मर्यादा की रक्षा करो या सरकार गिरा दो। जानिए कैसे यह कानून सवर्णों के वैधानिक संहार की पटकथा है और क्यों ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ ही अंतिम मार्ग है।”

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आक्रांताओं से अत्याचारी सरकार - सनातन पर घनघोर प्रहार

आक्रांताओं से अत्याचारी सरकार – सनातन पर घनघोर प्रहार

“सावधान! क्या UGC का नया 2026 रेगुलेशन सवर्णों के समूल विनाश की पटकथा है? जानिए कैसे शिक्षा के नाम पर सवर्ण कुल-वधुओं और पुत्रों को प्रताड़ित करने और वर्णाश्रम धर्म को नष्ट कर गृहयुद्ध छेड़ने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। ‘दो टूक’ विश्लेषण।”

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हम संविधान के लिये नहीं बने हैं, संविधान हमारे लिये है - संविधान हमारा निर्माता नहीं, निर्मित संविदा है

हम संविधान के लिये नहीं बने हैं, संविधान हमारे लिये है – संविधान हमारा निर्माता नहीं, निर्मित संविदा है

धर्म बड़ा या संविधान? इस लेख में जानिए क्यों संविधान केवल राजधर्म का एक अंश है और कैसे हमारे मौलिक अधिकार नैसर्गिक हैं, संवैधानिक खैरात नहीं।

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संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता का अनर्थ - रसातल जाता समाज

संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता का अनर्थ – रसातल जाता समाज

“क्या संविधान स्वतंत्रता के नाम पर स्वछंदता का लाइसेंस है? धर्म, राजधर्म और आधुनिकता के छद्म पर एक प्रहार। जानिए क्यों नैसर्गिक मर्यादाओं को तोड़ना समाज को रसातल की ओर ले जा रहा है और क्यों हमारी अगली पीढ़ी हमें कभी क्षमा नहीं करेगी।”

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मकर संक्रांति का सर्वोपरि सन्देश: पारिवारिक अनुशासन एवं दायित्व-बोध

मकर संक्रांति का सर्वोपरि सन्देश: पारिवारिक अनुशासन एवं दायित्व-बोध

मकर संक्रांति का सर्वोपरि सन्देश: पारिवारिक अनुशासन एवं दायित्व-बोध : मकर संक्रांति पर आधारित यह आलेख पारिवारिक अनुशासन, माता-पिता की शास्त्रीय महिमा और युवाओं के कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन करता है। इसमें मनुस्मृति और महाभारत के संदर्भों से सुखमय जीवन का मार्ग बताया गया है।

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