हम संविधान के लिये नहीं बने हैं, संविधान हमारे लिये है – संविधान हमारा निर्माता नहीं, निर्मित संविदा है
धर्म बड़ा या संविधान? इस लेख में जानिए क्यों संविधान केवल राजधर्म का एक अंश है और कैसे हमारे मौलिक अधिकार नैसर्गिक हैं, संवैधानिक खैरात नहीं।
धर्म बड़ा या संविधान? इस लेख में जानिए क्यों संविधान केवल राजधर्म का एक अंश है और कैसे हमारे मौलिक अधिकार नैसर्गिक हैं, संवैधानिक खैरात नहीं।
“क्या संविधान स्वतंत्रता के नाम पर स्वछंदता का लाइसेंस है? धर्म, राजधर्म और आधुनिकता के छद्म पर एक प्रहार। जानिए क्यों नैसर्गिक मर्यादाओं को तोड़ना समाज को रसातल की ओर ले जा रहा है और क्यों हमारी अगली पीढ़ी हमें कभी क्षमा नहीं करेगी।”
मकर संक्रांति का सर्वोपरि सन्देश: पारिवारिक अनुशासन एवं दायित्व-बोध : मकर संक्रांति पर आधारित यह आलेख पारिवारिक अनुशासन, माता-पिता की शास्त्रीय महिमा और युवाओं के कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन करता है। इसमें मनुस्मृति और महाभारत के संदर्भों से सुखमय जीवन का मार्ग बताया गया है।
आत्मकल्याण : जन्मसिद्ध अधिकार और व्यवस्थागत हनन : यह आलेख पौराणिक आख्यानों और श्लोकों के माध्यम से यह सिद्ध करता है कि आत्मकल्याण का अधिकार भौतिक जीवन के अधिकार से श्रेष्ठ है और इसे भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में स्थान मिलना चाहिए।
AI (कृत्रिम मेधा) : सनातन शास्त्र के विषय में भ्रामक और पूर्णतः अविश्वसनीय – “इस आलेख में देखें कि किस प्रकार कृत्रिम मेधा (AI) सनातन शास्त्रों और संक्रांति निर्णय जैसे विषयों पर भ्रामक और कपोल-कल्पित तथ्य परोसता है। एक वास्तविक संवाद सत्र के माध्यम से AI की अप्रामाणिकता और मशीनी धूर्तता का पर्दाफाश।”
मंडप षोडश स्तम्भ पूजन मंत्र (पौराणिक) – stambh pujan mantra : जब विधि पूर्वक स्तम्भादि स्थापन करके मंडप निर्माण किया जाता है तो उसमें षोडश स्तम्भ होते हैं और सभी स्तम्भों में विशेष देवताओं का आवाहन-पूजन किया जाता है।
पौराणिक अग्न्युत्तारण विधि मंत्र – agni uttaran mantra : यहां अग्न्युत्तारण के पौराणिक मंत्रों का संकलन किया गया है जो कर्मकांडियों के लिये विशेष उपयोगी सिद्ध होगा।
पौराणिक अग्न्युत्तारण विधि मंत्र – agni uttaran mantra : यहां अग्न्युत्तारण के पौराणिक मंत्रों का संकलन किया गया है जो कर्मकांडियों के लिये विशेष उपयोगी सिद्ध होगा।
चौसठ योगिनी पूजा विधि (पौराणिक) – chausath yogini puja : योगिनी मंडल में आवाहन पूजन वामावर्त्त अर्थात अप्रदक्षिण/अपसव्य क्रम से किया जाता है। चतुःषष्टि योगिनी मंडल में आठ पंक्तियां होती है अतः आठ आवरणों में मंडल पूजा की जाती है। इस आलेख में योगिनी मंडल का पौराणिक आवाहन मंत्र और पूजा विधि दी गयी है।
81 पद वास्तु मंडल पूजन मंत्र (पौराणिक) – vastu mandal pujan : यहां वास्तु मंडल पूजन के पौराणिक मंत्रों का संकलन किया गया है जो कि लक्ष्मीनारायण संहिता में वर्णित है अर्थात प्रामाणिक होने के कारण इसकी उपयोगिता में और वृद्धि होती है।