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संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता का अनर्थ - रसातल जाता समाज

संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता का अनर्थ – रसातल जाता समाज

“क्या संविधान स्वतंत्रता के नाम पर स्वछंदता का लाइसेंस है? धर्म, राजधर्म और आधुनिकता के छद्म पर एक प्रहार। जानिए क्यों नैसर्गिक मर्यादाओं को तोड़ना समाज को रसातल की ओर ले जा रहा है और क्यों हमारी अगली पीढ़ी हमें कभी क्षमा नहीं करेगी।”

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मकर संक्रांति का सर्वोपरि सन्देश: पारिवारिक अनुशासन एवं दायित्व-बोध

मकर संक्रांति का सर्वोपरि सन्देश: पारिवारिक अनुशासन एवं दायित्व-बोध

मकर संक्रांति का सर्वोपरि सन्देश: पारिवारिक अनुशासन एवं दायित्व-बोध : मकर संक्रांति पर आधारित यह आलेख पारिवारिक अनुशासन, माता-पिता की शास्त्रीय महिमा और युवाओं के कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन करता है। इसमें मनुस्मृति और महाभारत के संदर्भों से सुखमय जीवन का मार्ग बताया गया है।

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आत्मकल्याण : जन्मसिद्ध अधिकार और व्यवस्थागत हनन

आत्मकल्याण : जन्मसिद्ध अधिकार और व्यवस्थागत हनन

आत्मकल्याण : जन्मसिद्ध अधिकार और व्यवस्थागत हनन : यह आलेख पौराणिक आख्यानों और श्लोकों के माध्यम से यह सिद्ध करता है कि आत्मकल्याण का अधिकार भौतिक जीवन के अधिकार से श्रेष्ठ है और इसे भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में स्थान मिलना चाहिए।

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