हम संविधान के लिये नहीं बने हैं, संविधान हमारे लिये है - संविधान हमारा निर्माता नहीं, निर्मित संविदा है

हम संविधान के लिये नहीं बने हैं, संविधान हमारे लिये है – संविधान हमारा निर्माता नहीं, निर्मित संविदा है

धर्म बड़ा या संविधान? इस लेख में जानिए क्यों संविधान केवल राजधर्म का एक अंश है और कैसे हमारे मौलिक अधिकार नैसर्गिक हैं, संवैधानिक खैरात नहीं।

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संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता का अनर्थ - रसातल जाता समाज

संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता का अनर्थ – रसातल जाता समाज

“क्या संविधान स्वतंत्रता के नाम पर स्वछंदता का लाइसेंस है? धर्म, राजधर्म और आधुनिकता के छद्म पर एक प्रहार। जानिए क्यों नैसर्गिक मर्यादाओं को तोड़ना समाज को रसातल की ओर ले जा रहा है और क्यों हमारी अगली पीढ़ी हमें कभी क्षमा नहीं करेगी।”

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