विकास की वेदी पर अस्तित्व की आहुति: क्या २०४७ का भारत केवल एक जलता हुआ खंडहर होगा?
विकास के नाम पर सवर्णों के अस्तित्व के संहार की सूक्ष्म पड़ताल। क्या २०४७ का भारत विकसित होगा या गृहयुद्ध की ज्वाला में जल रहा होगा? ‘दो टूक’ अन्वेषण।
विकास के नाम पर सवर्णों के अस्तित्व के संहार की सूक्ष्म पड़ताल। क्या २०४७ का भारत विकसित होगा या गृहयुद्ध की ज्वाला में जल रहा होगा? ‘दो टूक’ अन्वेषण।
“UGC के नए ‘हायर एजुकेशन रेगुलेशन 2026’ का विस्फोटक विश्लेषण। सवर्ण सांसदों को खुली चेतावनी: या तो सवर्णों की मेधा और मर्यादा की रक्षा करो या सरकार गिरा दो। जानिए कैसे यह कानून सवर्णों के वैधानिक संहार की पटकथा है और क्यों ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ ही अंतिम मार्ग है।”
“सावधान! क्या UGC का नया 2026 रेगुलेशन सवर्णों के समूल विनाश की पटकथा है? जानिए कैसे शिक्षा के नाम पर सवर्ण कुल-वधुओं और पुत्रों को प्रताड़ित करने और वर्णाश्रम धर्म को नष्ट कर गृहयुद्ध छेड़ने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। ‘दो टूक’ विश्लेषण।”
धर्म बड़ा या संविधान? इस लेख में जानिए क्यों संविधान केवल राजधर्म का एक अंश है और कैसे हमारे मौलिक अधिकार नैसर्गिक हैं, संवैधानिक खैरात नहीं।
“क्या संविधान स्वतंत्रता के नाम पर स्वछंदता का लाइसेंस है? धर्म, राजधर्म और आधुनिकता के छद्म पर एक प्रहार। जानिए क्यों नैसर्गिक मर्यादाओं को तोड़ना समाज को रसातल की ओर ले जा रहा है और क्यों हमारी अगली पीढ़ी हमें कभी क्षमा नहीं करेगी।”