विकास की वेदी पर अस्तित्व की आहुति: क्या २०४७ का भारत केवल एक जलता हुआ खंडहर होगा?

विकास की वेदी पर अस्तित्व की आहुति: क्या २०४७ का भारत केवल एक जलता हुआ खंडहर होगा?

विकास के नाम पर सवर्णों के अस्तित्व के संहार की सूक्ष्म पड़ताल। क्या २०४७ का भारत विकसित होगा या गृहयुद्ध की ज्वाला में जल रहा होगा? ‘दो टूक’ अन्वेषण।

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