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वह्निवास अर्थात अग्निवास विचार – हवन करने के लिए अग्निवास कैसे निकालते हैं ?

अग्निवास विचार - हवन करने के लिए अग्निवास कैसे निकालते हैं अग्निवास विचार - हवन करने के लिए अग्निवास कैसे निकालते हैं

वह्निवास अर्थात अग्निवास विचार – हवन करने के लिए अग्निवास कैसे निकालते हैं ?

अग्निवास विचार

अग्निवास का तात्पर्य कर्मकांड के परिप्रेक्ष्य में सूक्ष्म रूप से अग्नि पृथ्वी, पाताल और आकाश में वास किया करते हैं, जिसका निर्धारण विशेष ज्योतिषीय गणना द्वारा किया जाता है। अग्नि जब भूमिवास में हों अर्थात सूत्रानुसार ज्ञात करने पर जब अग्नि का वास भूमि ज्ञात हो तभी हवन करना चाहिये। 

अग्निवास ज्ञात करने का सूत्र :

सैका तिथिर्वारयुता कृताप्ता शेषे गुणेऽभ्रे भुवि वह्निवासः ।
सौख्याय होमे शशियुग्मशेषे प्राणार्थनाशो दिवि भूतले च ॥

शुक्लप्रतिपदमारभ्यात्र गणनेति सांप्रदायिका ज्योतिर्विदः । एकया [१] सहिता सैका गणितासु तिथिष्वधिकैका तिथिर्गणयितव्येत्यर्थः । अत्रैकवचनं द्वित्रादितिथिविषये जात्यभिप्रायं ज्ञेयम् । वारैर्युता कृताप्तेत्येतद्द्वयं तिथिविशेषणम् । कृतशब्देन कृतादियुगचतुष्टयबोधितचतुःसंख्या लक्ष्यते । तेन चतुःसंख्याया लाभः । आप्ता भाजिता । गुणास्त्रयः । अभ्रं शून्यम्। शश्येकः । युग्मं द्वौ । अन्यत्स्पष्टम् । 

 एतदपवादस्तत्रैव – इसका अपवाद भी है :

“नित्ये नैमित्तिके कर्मण्यग्निचक्रं न विद्यते” इति ॥     :- संस्काररत्नमाला ॥१२५

अर्थात नित्य और नैमित्तिक कर्मों में हवन करने हेतु अग्निवास विचार नहीं होता है। 

शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर इष्टतिथिपर्यन्त गिनने से जितनी संख्या हो उसमें एक और जोड़े, फिर रविवार से लेकर इष्टवारपर्यन्त गिनने से जितनी संख्या हो उसको भी उसी में जोड़े। उस अङ्क में चार का भाग दे । यदि तीन अथवा शून्य शेष रहे तो अग्नि का वास भूमि में जाने। वह सौख्यकारक होता है। यदि एक शेष हो तो अग्नि का वास आकाश में जाने। वह होम करनेवाले के प्राण का नाश करता है और यदि दो शेष रहें तो अग्नि का वास पाताल में जाने । वह धन की हानि करता है ॥

विवाह यात्रा व्रत गोचरेषु, चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ, नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं  

महारुद्र व्रतेमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके काम्ये अग्निचक्रं न दर्शयेत् 
 

नित्य और नैमित्तिक कर्मों में हवन करने हेतु अग्निवास विचार नहीं होता है, यह पूर्व ही स्पष्ट हो चुका है, उसके अतिरिक्त कुछ अन्य विशेष कर्म भी बताये गये हैं जिसमें अग्निवास का विचार नहीं किया जाता है : विवाह, यात्रा, व्रत, गोचर, चौल, उपनयादि, दुर्गाविधान अर्थात नवरात्र, जातकर्म और वर्धापन इत्यादि दिनों में हवन करने हेतु अग्निवास विचार करने की आवश्यकता नहीं होती। पुनः महारुद्रादि यज्ञ, व्रत, अमावास्या, ग्रहण, नित्य-नैमित्तिक, काम्य इन सभी कर्मों में अग्निवास का विचार न करे। इसी प्रकार अन्य कर्म यथा गृहारम्भ, गृहप्रवेश, प्रतिष्ठा आदि में भी अग्निवास विचार करने की आवश्यकता नहीं होती। 

 

 

      अग्निवास चक्र      
  तिथि वार  
  शुक्ल कृष्ण रवि सोम कुज बुध गुरु शुक्र शनि  
  पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी    
  पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी      
      पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी  
    पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी  
  पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी    
  पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी      
      पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी  
    पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी  
  १० पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी    
  १० ११ पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी      
  ११ १२     पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी  
  १२ १३   पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी  
  १३ १४ पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी    
  १४ ३० पृथ्वी     पृथ्वी पृथ्वी      
  १५     पृथ्वी पृथ्वी     पृथ्वी  
                   

यूट्यूब विडिओ – https://youtu.be/LP7frQR5TFg

 

 

अग्नि वास चार्ट 2024

 

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