karmkandipandit@gmail.com

कर्मकांड विधि

सर्वतोभद्र मंडल वेदी – पूजन

सर्वतोभद्र मंडल – पूजन (पौराणिक) – sarvatobhadra mandal puja vidhi

वर्त्तमान काल में जिस प्रकार से वेदाधिकार से लोग च्युत होते जा रहे हैं उस संदर्भ में यही आवश्यक हो जाता है कि पौराणिक मंत्रों से ही पूजनादि का आश्रय ग्रहण करें क्योंकि अनधिकृत रूप से वेदमंत्र का प्रयोग करना दोषद ही होता है। एवं उक्त परिस्थिति में यह संकलन अत्युपयोगी सिद्ध होगा। इस आलेख में सर्वतोभद्र मंडल देवताओं का पौराणिक आवाहन और पूजन विधि व मंत्र दिया गया है।

Read More
पौराणिक नवग्रह मंडल पूजा विधि और मंत्र - navgrah mandal pujan

पौराणिक नवग्रह मंडल पूजा विधि और मंत्र – navgrah mandal pujan

पौराणिक नवग्रह मंडल पूजा विधि और मंत्र – navgrah mandal pujan : जब नवग्रह मंडल बनाकर पूजा की जाती है तो नवग्रह मंडल पर अधिदेवता-प्रत्यधिदेवता-पंचलोकपालादि का भी आवाहन-पूजन किया जाता है। नवग्रह वेदी यदि बनाना न आये तो अष्टदल बनाकर भी पूजा की जा सकती है। इस आलेख में नवग्रह मंडल देवताओं का आवाहन और पूजन का पौराणिक मंत्र दिया गया है।

Read More
पंच देवता ध्यान मंत्र - panch devta dhyan mantra

पंच देवता ध्यान मंत्र – panch devta dhyan mantra

पंच देवता ध्यान मंत्र – panch devta dhyan mantra : पंचदेवता की पूजा में हमें उनके मंत्रों का विशेष रूप से ज्ञान होना आवश्यक है और पूजा भले ही नाम मंत्र से भी कर लें किन्तु ध्यान के मंत्र तो ज्ञात होने ही चाहिये। यहां पंचदेवता के ध्यान मंत्र दिये गये हैं जो कि संस्कृत में हैं।

Read More
शिव पूजा में शंख बजाना चाहिए या नहीं - shiv puja me shankh bajana

शिव पूजा में शंख बजाना चाहिए या नहीं – shiv puja me shankh bajana

शिव पूजा में शंख बजाना चाहिए या नहीं – shiv puja me shankh bajana : शिव पूजा में शंख से जल अर्पित करना चाहिये अथवा नहीं यह चर्चा भी सप्रमाण की गयी है व अन्यान्य प्रश्नों के भी प्रामाणिक उत्तर देने का प्रयास किया गया है

Read More
पौराणिक पुण्याहवाचन विधि - punyahavachanam sanskrit

पौराणिक पुण्याहवाचन विधि – punyahavachanam sanskrit

पौराणिक पुण्याहवाचन विधि – punyahavachanam sanskrit : कल्याण कामना हेतु ब्राह्मणों से कल्याणकारी वचन प्राप्त करना पुण्याहवाचन कहलाता है। विशेष अवसरों के अतिरिक्त किसी प्रकार के अपशकुन आदि की स्थिति में भी पुण्याहवाचन कराया जा सकता है।

Read More
कलश स्थापना विधि और मंत्र

पौराणिक कलश स्थापना विधि और मंत्र – kalash pujan

पौराणिक कलश स्थापना विधि और मंत्र – kalash pujan : हम यहां पौराणिक कलश स्थापना व पूजन मंत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें यह समझना भी आवश्यक है कि पौराणिक विधि की आवश्यकता कब होती है ? जिसका वेदोक्त विधि में अनधिकार हो उसके लिये पौराणिक विधान होता है।

Read More

स्वस्तिवाचन मंत्र पौराणिक – Swastiwachan

स्वस्तिवाचन मंत्र पौराणिक – Swastiwachan : पूजा-अनुष्ठानकिसी भी धार्मिक अनुष्ठान में पवित्रीकरणादि के पश्चात प्रथमतः स्वस्तिवाचन किया जाता है।  भद्रसूक्त का पाठ करना स्वस्तिवाचन कहलाता है । भद्रसूक्त उन मंत्रों का समूह है जिसमें हम कल्याणकामना करते हैं । जब हमें पौराणिक स्वस्तिवाचन की आवश्यकता होती है तो सरलता से उपलब्ध नहीं होती और हम विकल्पाभाववश भद्रसूक्त का ही पाठ कर देते हैं।

Read More
अनुपनीतों के लिये पुराणोक्त नारायण बलि करने की विधि - narayan bali vidhi

अनुपनीतों के लिये पुराणोक्त नारायण बलि करने की विधि – narayan bali vidhi

अनुपनीतों के लिये पुराणोक्त नारायण बलि करने की विधि – narayan bali vidhi : नारायण बलि दुर्मरण दोष निवारण करने हेतु किया जाने वाला श्राद्ध कर्म है। नारायण बलि में 16 पिण्ड दान किया जाता है। नाग बलि सर्प दोष या कालसर्प दोष निवारण करने हेतु की जाने वाली सर्प पूजा विधि का नाम है। नाग बलि में द्वादश प्रकार के सर्पों की विशेष विधि से पूजा आदि किया जाता है। मुख्य नारायण बलि श्राद्ध विधि “संपूर्ण कर्मकांड विधि” पर प्रकाशित है यदि उसका अवलोकन करना चाहें तो यहां क्लिक करके कर सकते हैं।

Read More
गणपत्यथर्वशीर्ष पुरश्चरण विधि - ganpati atharvashirsha purashcharan vidhi

गणपत्यथर्वशीर्ष पुरश्चरण विधि – ganpati atharvashirsha purashcharan vidhi

गणपत्यथर्वशीर्ष पुरश्चरण विधि – ganpati atharvashirsha purashcharan vidhi : गणपत्यथर्वशीर्ष तो कर्मकांड की पुस्तकों में सरलता से उपलब्ध है और सबको मिल जाती है। किन्तु यदि इसके पुरश्चरण प्रयोग अर्थात पुरश्चरण विधि की बात करें तो ढूंढते ही रह जाते हैं। यह आलेख इसलिये विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहां गणपत्यथर्वशीर्ष पुरश्चरण विधि (ganpati atharvashirsha purashcharan vidhi) दी गयी है।

Read More
प्रदक्षिणा अनुष्ठान - pradakshina

प्रदक्षिणा अनुष्ठान – pradakshina

प्रदक्षिणा अनुष्ठान – pradakshina : प्रदक्षिणा तो सभी पूजा का अंग है और कोई भी पूजा हो अंत में प्रदक्षिणा भी की ही जाती है। प्रदक्षिणा ही प्रधान हो और विशेष निर्धारित संख्या में करनी हो तो उसे देवता संबंधी प्रदक्षिणा अनुष्ठान कहते हैं।

Read More