सभी पूजा-अनुष्ठानादि में तो सर्वप्रथम गणेशाम्बिका अर्थात गणेश और गौरी की पूजा की ही जाती है इसके अतिरिक्त भी एक अन्य विधान है जिसके लिये इस आलेख की आवश्यकता है एवं इस कारण से यह आलेख विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। इस आलेख में गौरी पूजा से सम्बंधित सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय की चर्चा तो की ही गयी है इसके साथ ही सरलता से गौरी पूजा के लिये विधि और मंत्र भी दिया गया है अर्थात गौरी पूजन मंत्र (Gauri Pujan Mantra) दिया गया है और इसका pdf भी दिया गया है जिसे डाउनलोड भी किया जा सकता है।
गौरी पूजन मंत्र और विधि-विधान ~ Gauri Pujan Mantra
गौरी पूजा के संबंध में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सभी पूजा-अनुष्ठानों के अतिरिक्त स्त्रियों के लिये नित्य गौरी पूजा का विधान है। सुख-सौभाग्य के कामना से सभी सौभाग्यवती स्त्रियों के लिये नित्य अर्थात प्रतिदिन गौरी पूजन का विधान है और सौभाग्वती स्त्रियां पूजा करती भी हैं। किन्तु मंत्रादि का ज्ञान न होने के कारण बिना मंत्र के ही करती हैं और यदि सरल मंत्र उपलब्ध हो तो समंत्र पूजा भी की जा सकती है जो और अधिक फलकारक हो सकता है।
विशेष पूजा में तो वैदिक पौराणिक मंत्रों के भी प्रयोग किये जाते हैं किन्तु जब बात नित्य पूजा की हो और जहां बिना मंत्र के ही पूजा कर लिया जाता हो वहां यदि नाममंत्र से भी पूजन किया जाय तो पर्याप्त माना जा सकता है। वैसे स्त्रियों का वेद मंत्रों और प्रणव में अधिकार ही नहीं है अतः वेद मंत्र से पूजा विधि देने का तो कोई औचित्य ही नहीं है और पौराणिक मंत्रों से विस्तृत पूजा विधि देना भी उपर्युक्त नहीं है।
नित्य पूजा जितना सरल हो सके किया जा सकता है और आरम्भ तो सरल विधि से ही करनी चाहिये तत्पश्चात यदि और विस्तार भी करना हो तो करना चाहिये।
इन्ही कारणों से यहां नाम मंत्र से ही पूजा करने की सरल विधि दी गयी है। चूँकि स्त्रियों को प्रणव का प्रयोग नहीं करना चाहिये इसलिये प्रणव रहित नाममंत्र दिया गया है।
गौरी पूजन विधि
सरल पूजा में सर्वप्रथम धूप-दीप जलाकर नैवेद्य आदि यथास्थान लगा लेना चाहिये। स्वयं पवित्र होकर सर्वप्रथम ध्यान पूर्वक गौरी को जल अर्पित करके स्नान कराना चाहिये।
चूंकि गौरी की प्रतिमा रखकर पूजा की जाती है इसलिये प्रतिमा को नित्य स्नान कराना भी आवश्यक होता है। तदुपरांत वस्त्र धारण कराना चाहिये।
तदुपरांत चन्दन, सिंदूर, अक्षत, पुष्प, बिल्वपत्र, माला आदि अर्पित करके धूप-दीप दिखाना चाहिये फिर नैवेद्य अर्पित करके आचमन हेतु जल देकर पुष्पांजलि अर्पित करे। इन्हीं विधियों के लिये नीचे नाम मंत्र दिये गये हैं और उन नाममंत्रो का प्रयोग करके उपरोक्त विधि के अनुसार पूजा करे।
गौरी पूजन नाममंत्र संस्कृत में
पवित्रीकरण मंत्र : नमो अपवित्रः पवित्रोऽवा सर्वावस्थाङ्गतोऽपि वा यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याऽभ्यन्तरः शुचि: । पुण्डरीकाक्षः पुनातु । नमो पुण्डरीकाक्षः पुनातु ॥
ध्यान
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥
- जल (स्नान) : एतानि पाद्यार्घाचमनीयस्नानीयानि नमो गौर्यै नमः॥
- फूल चंदन : इदं सचंदनपुष्पं नमो गौर्यै नमः॥
- सिंदूर : इदं सिंदूरं नमो गौर्यै नमः॥
- बिल्वपत्र : इदं बिल्वपत्रं नमो गौर्यै नमः ॥
- अक्षत : इदं अक्षतं नमो गौर्यै नमः ॥
- धूप : एष धूपः नमो गौर्यै नमः ॥
- दीप : एष दीपः नमो गौर्यै नमः ॥
- नैवेद्य : इदं नैवेद्यं नमो गौर्यै नमः ॥
- जल : आचमनीयं पुनराचमनीयम् नमो गौर्यै नमः ॥
पुष्पांजलि
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥
पुष्पांजलिं नमो गौर्यै नमः ॥
गौरी पूजन मंत्र pdf
यदि आप गौरी पूजन मंत्र (Gauri Pujan Mantra) pdf डाउनलोड करना चाहते हैं तो नीचे pdf भी दिया गया है जिसे डाउनलोड कर सकते हैं :
विनम्र आग्रह : त्रुटियों को कदापि नहीं नकारा जा सकता है अतः किसी भी प्रकार की त्रुटि यदि दृष्टिगत हो तो कृपया सूचित करने की कृपा करें : info@karmkandvidhi.in
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